जब दुनिया आपसे आपके उसूलों से समझौता करने को कहे, तो इस सूरह को अपनी ढाल बनाएं। अपनी आध्यात्मिक सीमाएं तय करें और अपने अटूट विश्वास में सुकून पाएं।